Wednesday, April 15, 2026

रैंक - 80 (पुस्तक समीक्षा)

पुस्तक - रैंक 80
लेखक - गोलू सेन कुंभराजी
प्रकाशक - flydreams publication
पृष्ठ - 164
मूल्य - ₹249/-
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कुछ कहानियाँ संघर्ष और प्रेम को एक साथ लेकर चलती हैं। उसी में से एक है ‘रैंक 80’। लेखक ‘गोलू सेन कुंभराजी’ ने रैंक 80 के माध्यम से यह बताया कि भारत के आज भी कुछ हिस्सों में लड़कियों की शिक्षा बहुत पीछे है। तो कुछ हिस्सों में आज भी साहूकारों के ब्याज के जाल में लोग फंसे हुए हैं। 
पहले अध्याय में संध्या के संघर्ष की भूमिका बांधी गयी है। तो ऐसा प्रतीत होता है कि आगे पूरी कहानी संध्या के दृष्टिकोण से देखने को मिलेगी, लेकिन अगले ही अध्याय में कहानी में रुद्र का आगमन होता है और कहानी संध्या से रुद्र की तरफ खिसक जाता है और संध्या सिर्फ एक सहयोगी पात्र बनकर रह जाती है। यहाँ लेखक ने ऐसा प्रयोग क्यों किया है, ये तो वही बता सकते हैं। कहानी का बैकग्राउंड upsc है। वैसे तो upsc के मुद्दे पर आज से दस-बारह साल पहले कई उपन्यास लिखे गए और उसमें कई हिट भी हुए। इस कारण इस किताब में फिर से आपको दिल्ली के मुखर्जी नगर के दर्शन होंगे। upsc मुद्दे के कारण किताब में दुहरावपन का शिकार होती है। लेकिन अन्य upsc आधीरात उपन्यासों में कॉमेडी का तड़का होता है, वह इसमें गायब है।
किताब अच्छी बनी है, एकबार पढ़ने लायक है।


समीक्षक - अभिलाष दत्ता

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